गर्भवती महिलाओं के लिए ज़रूरी रक्त परीक्षण

Important pregnancy tests

लेखिका- डॉ.धृती वत्स

एक महिला के शरीर को भगवन की सब सुन्दर रचना  माना जाता है। सभी के दिलों का ख्याल रखने के साथ साथ, महिलाओं के पास अपने अंदर एक नए दिल को बनाने की क्षमता है। महिलाऐं एक सूक्ष्म जीव से नया जीवन बनाने की शक्ति रखती हैं। मातृत्व की ज़िम्मेदारियाँ अनंत है। जिस दिन से महिलाओं को पता चलता है की वह गर्भवती है उस दिन से उन्हें अपनी सेहत का खास ख्याल रखना पढ़ता है।  उन्हें शुरूवाती दिनों से ही यह जांचना पढ़ता है की क्या वह एक नए जीवन को पलने के लिए सेहतमंद है। उन्हें हमेशा यह चिंता रहती है की क्या उनका शरीर एक जन्म देने के लिए शक्तिशाली है। इन सभी प्रश्नों के सवालों के लिए नियमित रूप से चिकित्सा ज़रूरी है।

जैसे ही आपको एक सकारात्मक गर्भावस्था प्रशिक्षण मिलता है आपका गयनेकोलॉजिस्ट के पास जाना ज़रूरी है। क्यूंकी आपने 9 महीने की गर्भावस्था अवधि में कदम रखा है, डॉक्टर आपको गर्भावस्था के पहले तिमाही के दौरान कुछ रक्त परीक्षण की सलाह देगा। यह प्रशिक्षण इसलिए ज़रूरी है क्युकी यह जानना ज़रूरी होता है की क्या आपका शरीर आपके अंदर एक नए जीवन को पोषित करने के लिए स्वस्थ है या नहीं। बच्चे को आपके शरीर और रक्त के माध्यम से ही सभी पोषण मिलता है, इसलिए आपके स्वास्थ्य की नियमित रूप से निगरानी करने की आवश्यकता होती है। परीक्षण शिशु सप्ताह के विकास के अनुसार सप्ताह या त्रिमेस्टर (3 महीने की अवधि) के अनुसार किए जाते हैं।

डॉक्टर आपके वज़न और रक्तचाप का रिकॉर्ड रखेंगें तथा कुछ अन्य प्रशिक्षण भी किये जानेंगे:

 

Blood count test - Healthians

 

पूर्ण रक्त गणना

आपके शरीर में चल रहा रक्त अंदर विकसित हो रहे भ्रूण के पोषण का एकमात्र स्रोत है इसलिए रक्त की संरचना को जांचना पड़ता है ताकि बच्चे को एक स्वस्थ आपूर्ति दी जा सके। इसके लिए विभिन्न कोशिकाओं यानी आर.बी.सी, डब्ल्यू.बी.सी. और प्लेटलेट्स की पूरी रक्त गणना की जाती है। प्रमुख रूप से हीमोग्लोबिन की नियमित निगरानी की जाती है ताकि मां और गर्भस्थ शिशु एनेमिक न हो जाएं। यदि आप आयरन की कमी के कारण एनेमिक हैं, तो आपका डॉक्टर आपको आयरन के स्तर को बढ़ाने के लिए खाने के लिए सर्वोत्तम खाद्य पदार्थों के बारे में बताएगा। वह आयरन की गोलियां भी देंगें क्योंकि गर्भावस्था में एनीमिया के इलाज का यह सबसे अच्छा तरीका है। स्तरों की दोबारा जाँच करने के लिए 8-10 सप्ताह की अवधि के बाद इस परीक्षण को दोहराया जा सकता है।

 

रूबेला एंटीबॉडी की स्थिति

पहली तिमाही के दौरान रूबेला एंटीबॉडी के लिए सभी गर्भवती महिलाओं की जाँच की जाती है, क्योंकि यह भ्रूण के लिए बहुत हानिकारक हो सकती है। यदि मां के रक्त में रूबेला एंटीबॉडी है तो बच्चे के जन्मजात दोष जैसे अंधेपन या बहरेपन के साथ जन्म लेने की संभावना अधिक होती है। यदि मां का टीकाकरण नहीं हुआ है, तो यह भ्रूण को पारित हो सकता है। यह भी याद रखें कि गर्भावस्था के दौरान रूबेला का टीका नहीं दिया जा सकता है।

 

हेपेटाइटिस बी

यदि मां हेपेटाइटिस बी की वाहक है, तो अध्ययन से पता चलता है कि 85% शिशु हेपेटाइटिस बी के साथ पैदा होते हैं। यह एक जिगर की बीमारी के साथ पैदा होने वाले शिशु के जोखिम को बढ़ाएगा। जैसे ही बच्चा पैदा होता है उसको टीका और एंटीबॉडी के इंजेक्शन की एक श्रृंखला के साथ संरक्षित करने की आवश्यकता होती है। जब बच्चा एक साल की उम्र में आजाता है तो रक्त परीक्षण से निश्चित किया जाता है की वह संक्रमण से बचा है या नहीं।

 

Blood group test - Healthians

 

ब्लड ग्रोपिंग और आरएच फैक्टर

रक्त समूह को जानना बहुत महत्वपूर्ण है। सभी रक्त समूहों में O सबसे आम है। आरएच की स्थिति भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि आप रीसस नकारात्मक हैं और आपका साथी सकारात्मक है, तो आपके बच्चे का रीसस सकारात्मक होने की एक उच्च संभावना है। इस स्थिति में, आपका शरीर एंटीबॉडी का उत्पादन कर सकता है जो आपके बच्चे की लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला करना शुरू कर देता है। 28 सप्ताह में दिए गए इम्युनोग्लोबुलिन नामक पदार्थ का इंजेक्शन ऐसा होने से रोकता है।

 

एचआईवी / एड्स

सभी माओं को एचआईवी वायरस की उपस्थिति का परीक्षण करना चाहिए क्योंकि यह बीमारी आसानी से बच्चे को हस्तांतरित हो जाती है। यदि आपक एचआईवी सकारात्मक है तो भ्रूण में संक्रमण होने के जोखिम को कम करने के तरीके आज़माए जाने चाहिए।

 

मधुमेह जांच

ज्यादातर गर्ववती महिलाएं में दूसरी तिमाही के दौरान गेस्टेशनल डायबिटीज की प्रगति होती है। यदि आपके पास मधुमेह का पारिवारिक इतिहास है या आप अधिक वजन वाले हैं तो मधुमेह की जांच करवाएं। एक ग्लूकोज सहिष्णुता परीक्षण आम तौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए किया जाता है।

 

एंटीनेटल यूरिन टेस्ट

यूरिन टेस्ट किसी भी तरह के यूरिन संक्रमण की जाँच के लिए किया जाता है। यूरिन संक्रमण से प्री-टर्म लेबर हो सकता है इसलिए इसका इलाज ज़रूरी होता है।

This post has already been read 2505 times!

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *