मानसिक समस्याओं के लक्षण और उनसे निपटने के तरीके

Mental health - Healthians

लेखिका – प्रेक्षा बुट्टन 

इन दिनों मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत ध्यान दिया जा रहा है। आखिरकार यह हमारे काम करने की क्षमता, हमारे व्यवहार, हमारे रिश्तों और हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। जो व्यक्ति दिन-प्रतिदिन के तनावों से निपट सकता है, समुदाय में योगदान करने के सक्षम है, उत्पादक रूप से काम कर सकता है, और अपनी योग्यताों का एहसास रखता  है, उस व्यक्ति को मानसिक रूप से स्वस्थ माना जा सकता है। लेकिन आपका यह जानना भी ज़रूरी है की मानसिक स्वास्थ्य मानसिक बीमारी का अभाव नहीं है।

मानसिक स्वास्थ्य सरल नहीं है। शारीरिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति गंभीर मानसिक बिमारियों से पीड़ित हो सकता है। इसलिए आपके लिए मानसिक बिमारियों के लक्षणों को समझना ज़रूरी है ताकि आप समय पर अपनी और आपने प्रियजनों से मदद कर सकें। 

 

Mental illness symptoms - Healthians

व्यासको में मानसिक बीमारी के लक्षण

  • अत्याधिक चिंता
  • चिड़चिड़ापन
  • खाने और सोने की आदतों में बदलाव
  • आत्मघाती विचार
  • अस्पष्टीकृत शारीरिक बीमारी
  • मादक द्रव्यों का सेवन
  • मूड स्विंग
  • दिन-प्रतिदिन के तनाव से निपटने में असमर्थता
  • बार-बार क्रोध का प्रकोप

 

बच्चों में मानसिक बीमारी के लक्षण 

  • सीखने की विकलांगता
  • अति-सक्रीय 
  • आज्ञा का उल्लंघन
  • नखरे
  • खाने और सोने की आदतों में बदलाव
  • बुरे सपने

 

Coping with mental illness - Healthians

मानसिक बीमारी से कैसे निपटें?

मानसिक बीमारी से निपटना मुश्किल है लेकिन सही तकनीक वास्तव में प्रभावी हो सकती है। वैसे तो कई तकनीकें उपलब्ध है लेकिन जो आपके लिय सही हो, उसे ढूंढ़ना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मानसिक बीमारी से निपटने के कुछ तरीके यहां दिए गए हैं जिन्हें आप आज़मा सकते हैं और अपनी सूची में जोड़ सकते है। 

 

स्थिति को स्वीकार करें 

स्थिति को स्वीकार कर लेना ही एक मात्र रास्ता है। कल्पना कीजिए कि आपको गाड़ी चलानी है। लेकिन नींद की वजह से आप सड़क पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे है।  यदि आप अपनी स्थिति को स्वीकार नहीं करेंगे तो आप एक सड़क दुर्घटना को आमंत्रित करेंगे जिसे रोका जा सकता था। इसी तरह यदि आप अपनी मानसिक बीमारी के लक्षणों को अनदेखा करते है तो आप अपने जीवन में दुख को आमंत्रित करेंगे। इसलिए अपनी मानसिक स्थिति को दिल और दिमाग से स्वीकार करना ही इससे निपटने का पहला कदम है। 

 

अपने मन के विपरीत जाएं 

मानसिक बीमारी का सामना करने के लिए अपने मन के विपरीत जाना मुश्किल हो सकता है लेकिन यह निश्चित रूप से प्रभावी है। आपके मन में जो बातें आ रही हो उनके विपरीत काम करें। जैसे की आपका खाना खाने का बिलकुल मन नहीं कर रहा है। लेकिन आप अपनी इच्छा के खिलाफ जाएं और खाना खाएं। इस प्रकार आप अपने शरीर की आवश्यकताएं पूरी करेंगं, जिसमें आपका ही भला है। अपनी इच्छा के खिलाफ जाना वास्तव में बहुत कठिन हो सकता है लेकिन आप निश्चित रूप से अच्छा महसूस करेंगें। 

 

अपनी 5 इन्द्रियों का प्रयोग करें 

यह एक और तरीका है जो आपको मानसिक रूप से बेहतर महसूस करने में वास्तव में प्रभावी हो सकता है। यहां आप वास्तविकता में बने रहने के लिए अपनी 5 इंद्रियों का उपयोग करते हैं। मान लीजिए आप बहुत तनाव महसूस कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में आप अपनी पांच इन्द्रियों का प्रयोग करके खुद को तनाव से बाहर ला सकते है। आप अपने चारो तरफ देखें की आप कहा पर मौजूद है। अगर आप अपने दफ्तर में है तो आपने सहकर्मियों की बाते सुने। अपने घर से लाए हुए खाने को सूंघें और थोड़ा खा भी लें। इस तरह आप अपनी इन्द्रियों को सक्रीय करेंगें और जल्द ही अच्छा महसूस करने लगेंगें।

 

गहरी सांस लें 

आपने यह तरीका ज़रूर सुना होगा। गहरी सांस लेना वास्तव में दिमाग को शांत करने के लिए सबसे प्रभावी तरीका है। इसमें आपका 5-3-7 तरीके का पालन करना आवश्यक है। आप 5 सेकंड तक सांस लेंगे। फिर उसे 3 सेकंड तक रोक कर रखेंगें। और फिर 7 सेकंड तक उसे छोड़ेंगें। लगातार ऐसा करके आप आप अपने ह्रदय की गतिविधि को सामान्य कर लेंगें और बेहतर महसूस करेंगें। 

 

मदद मांगें 

अपनी भावनाओं को दूसरो के सामने व्यक्त करना कठिन हो सकता है। मन में यही डर रहता है की दुसरे लोग आपके विचारों को नहीं समझ पाएंगें और शायद कुछ ऐसा कह दे जिससे सुनने के लिए आप अभी तैयार नहीं है। लेकिन अपनी भावनाओं को व्यक्त करना लाभदायक होता है। अगर आपके दोस्त और परिवार आपकी मदद नहीं कर पा रहें हैं तो किसी पेशेवर से मदद लें। थेरेपिस्ट आपकी समस्याओं का पेशेवर तरीके से समाधान निकालेगा। वह आपको आपकी समस्या को समझकर बताएगा की मानसिक स्थिति से नपटने के लिए आपके लिए कौनसा तरीका सही रहेगा। इसलिए अगर आप खुद अपनी स्थिति का सामना नहीं कर पा रहे है तो मदद ज़रूर लें। 

 

मानसिक बीमारी से डरने की ज़रूरत नहीं है। बल्कि इसके लक्षणों को समय रहते पहचाने और इनसे निपटने का तरीका ढूंढें। 

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